जैविक विकास / Organic evolution

Organic evolution (जैविक विकास): जीवों की आबादी में पीढ़ी दर पीढ़ी होने वाले आनुवंशिक परिवर्तन को जैविक विकास कहते हैं। यह एक क्रमिक और सतत प्रक्रिया है। जिससे नई प्रजातियों का विकास होता है। उदाहरण: वानरों से मनुष्य का विकास। जैविक विकास से यह समझने में मदद मिलती है कि लाखों वर्षों में जीवन कैसे विविधतापूर्ण और अनुकूलित हुआ है।

Lamarckism (लैमार्कवाद): यह सिद्धांत, जीन-बैप्टिस्ट लैमार्क ने अपने किताब (फ़िलॉसफ़िक ज़ूलॉजिक) मे लिखा था। उन्होंने कहा,

(1) जीव अपने जीवनकाल के दौरान जिन अंगों का इस्तेमाल ज़्यादा करते है, वह ज़्यादा विकसित हो जाते हैं एवं जिन अंगों का इस्तेमाल कम करते है, उनका धीरे-धीरे विकास कम हो जाता है। (उपयोग और अनुपयोग का सिद्धांत / Theory of Use and Disuse)

(2) विकसित या कम हुए लक्षण संतानों में स्थानांतरित हो जाते हैं। (अर्जित विशेषताओं की विरासत / Inheritance of Acquired Characters)

उदाहरण: ऊँची पत्तियों तक पहुँचने के लिए अपनी गर्दन को फैलाने वाले जिराफ़ अपनी आने वाली पीढ़ी को लंबी गर्दन देते हैं।

Darwinism (डार्विनवाद): यह सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन द्वारा दिया गया था । उन्होंने कहा,

(1) अपने पर्यावरण के लिए अनुकूल लक्षणों (traits) वाले जीवों के जीवित रहने और प्रजनन की संभावना अधिक होती है तथा उन लाभकारी लक्षणों को अपनी संतानों में स्थानांतरित करते हैं। (प्राकृतिक चयन का सिद्धांत / Theory of Natural Selection)

(2) किसी भी वातावरण में, कुछ जीव दूसरों की तुलना में ज़्यादा जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं। (योग्यतम का अस्तित्व / survival of the fittest) ऐसा अक्सर उनके वंशानुगत लक्षणों की वजह से होता है ।

(3) एक ही प्रजाति के जीवों में भौतिक लक्षणों में विविधता होती है। कुछ विविधताएं वंशानुगत होती हैं और अगली पीढ़ी में चली जाती हैं। विकास एक क्रमिक (लंबी और धीमी) प्रक्रिया है। किसी समय सभी जीवों के एक ही पूर्वज थे और धीरे-धीरे इनमें भिन्नता आई है ।

Neo-Darwinism (नव-डार्विनवाद): यह सिद्धांत, डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत तथा मेंडेल के आनुवंशिकी के सिद्धांत मिलाजुला रूप है। इसमें आनुवंशिक बहाव (genetic drift), उत्परिवर्तन (mutation) और पुनर्संयोजन (recombination) पर अध्ययन किया गया तथा यह बताया गया कि आनुवंशिक भिन्नता कैसे उत्पन्न होती है और विरासत में मिलती है।

1) आनुवंशिक भिन्नता (genetic variation): आनुवंशिक उत्परिवर्तन (Genetic mutation) और पुनर्संयोजन (recombination) के कारण जीवों मे भिन्नता होती है।

2) जीन पूल (Gene Pool): प्राकृतिक रूप से चयनित जीव, जीन पूल पर कार्य करते हैं, तथा अनुकूल जीन पीढ़ी दर पीढ़ी अधिक सामान्य होते जाते हैं।

3) आनुवंशिक बहाव (Genetic Drift): जीन आवृत्तियों (gene frequencies) में यादृच्छिक उतार-चढ़ाव (Random fluctuations) से पीढ़ी दर पीढ़ी महत्वपूर्ण परिवर्तन होते रहते हैं।

4) जीन प्रवाह (Gene Flow): आबादियों के बीच जीनों का आवागमन आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) को बढ़ाता देता है।

5) उत्परिवर्तन (Mutation): डीएनए अनुक्रमों (DNA sequences) में यादृच्छिक परिवर्तन (Random changes) नए लक्षण (traits) बनाते हैं। जो वातावरण के लिये उच्चतम या हानिकारक भी हो सकते है।

6) क्रमिक परिवर्तन (Gradual Change): जीवो मे परिवर्तन एक जीवनकाल में नहीं, बल्कि पीढ़िदर पीढ़ी विकसित होते हैं।

Hugo de Vries' Mutation Theory (ह्यूगो डे व्रीस का उत्परिवर्तन सिद्धांत): ह्यूगो डे व्रीस ने सुझाव दिया कि नई प्रजातियाँ क्रमिक परिवर्तनों (gradual changes) के बजाय अचानक, बड़े उत्परिवर्तन (large mutations) से उत्पन्न होती हैं। उन्होंने इसे ओनोथेरा लैमार्कियाना (शाम प्रिमरोज़) पौधे में देखा।

समजातीय अंग (Homologous Organ): समजातीय अंग की संरचना समान होती है, लेकिन कार्य अलग-अलग होते हैं। उदाहरण के लिए, मनुष्यों, व्हेल और पक्षियों के अग्रपादों (forelimbs) में एक तरह की कंकाल संरचना होती है, लेकिन वे पकड़ने, तैरने और उड़ने जैसे अलग-अलग कार्य करते हैं। समजातीय अंग यह संकेत देते हैं कि जीव एक सामान्य वंश से उद्गम हुआ हैं।

अनुरूप / सदृश अंग (Analogous Organ): अनुरूप अंग की कार्य समान होते हैं, लेकिन संरचनात्मक उत्पत्ति अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए, पक्षियों और कीड़ों के पंख उड़ान भरने मे काम आते हैं, लेकिन दोनों संरचना में भिन्न होते हैं, क्योंकि वे अलग-अलग विकासवादी रास्तों से उत्पन्न हुए हैं। अनुरूप अंग यह संकेत देते हैं कि जीव एक सामान्य पूर्वज से नहीं बल्कि स्वतंत्र रूप से विकसित हुआ है।

अवशेषी अंग (Vestigial Organ): अवशेषी अंग, वैसे संरचनाओं के अवशेष हैं जो पैतृक प्रजातियों में कार्यात्मक थे, लेकिन आधुनिक प्रजातियों में अपना प्राथमिक कार्य खो चुके हैं। उदाहरण, मानव परिशिष्ट (human appendix)। अवशेषी अंग, विकासात्मक परिवर्तन (evolutionary change) का संकेत देते हैं, यह बताता है कुछ विशेषताएं समय के साथ उपयोगिता खो देती हैं।